मादक म्यूजिक और मचलते जिस्मः ऐसी होती है रेव पार्टी

मादक म्यूजिक और मचलते जिस्मः ऐसी होती है रेव पार्टी

 

  • भारत में कई बड़े शहरों से कभी कभार रेव पार्टी की ख़बरें तब सामने आती हैं, जब वहां पुलिस या अन्य संबंधित विभाग कार्रवाई करते हैं. या फिर ऐसी ख़बरे मीडिया में सुर्खियां बन जाती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन सवाल उठता है कि आखिर ये रेव पार्टी क्या होती है? कैसे होती है? कौन लोग इस पार्टी में शामिल होते हैं? क्यों ये पार्टियां समाज में अच्छी नजरों से नहीं देखी जाती है? आखिर इन पार्टियों में होता क्या है?

    1950 के दौरान लंदन, इंग्लैंड में पहली बार रेव शब्द का इस्तेमाल सोहो बेटनिक सेट की ‘बोहेमियन पार्टियों के बारे में विस्तार से बताने के लिए किया गया. वो खास की तरह की पार्टियां होती थी. जिसमें भागेदारी करने वाले पुरुष और महिलाएं अजीब तरह से बर्ताव करते थे. वे एक दूसरी ही दुनिया में चले जाते थे. उन पार्टियों में संगीत का बड़ा योगदान होता था. उस वक्त जैज संगीतकार मिक मुलिगन को रैवर्स का राजा कहा जाता था.

  • 1958 में ऐसी पागलपन और उन्माद से भरी पार्टियों के लिए रेव ऑन हिट शब्द भी इस्तेमाल किया गया. बाद में तेजी से ऐसी पार्टियों का चलन बढता गया. जिनमें आधुनिक तरीके भी शामिल होते रहे. उस समय कहा जाता था कि ऐसी पार्टियों में शामिल होने वाले लोग जंगलियों जैसा बर्ताव करते थे. इसलिए कुछ लोग रेव पार्टी को जंगली पार्टी भी कहते थे. 1960 के दशक में इन पार्टियों का चलन युवाओं के बीच तेजी से बढ़ने लगा. और ऐसी पार्टियों में भाग लेने वाले लोग पार्टी एनिमल या रेवर्स कहलाने लगे. 1960 के दशक के मध्य ही गेराज रॉक और साइकेडेलिया बैंड के लिए भी रेव शब्द इस्तेमाल होता था.

  • अमूमन इन पार्टियों में ढीले ढाले और रंगीन कपड़े पहनने का चलन रहा है. मूल रूप से हिप हॉप और फुटबॉल में पहने जाने वाले कपड़ों से प्रभावित पोशाकें इस तरह की पार्टियों में इस्तेमाल होती थीं. धीरे धीरे आधुनिक पोशाकों ने इसकी जगह ले ली. अमेरिका और अन्य देशों में बाकायदा रेव फैशन चलन में है. जिसमें रंगीन कपड़े और अन्य सामान पर विशेष ध्यान दिया जाता है. खासकर पर्स, बैग और आभूषण, जो पराबैंगनी प्रकाश के तहत फ्लोरोसेंट होते हैं. दुनिया में इन पार्टियों में एक शब्द का इस्तेमाल बहुत होता है. वो अंग्रेजी शब्द है ‘PLUR’ यानी शांति, प्रेम, एकता, सम्मान. इन पार्टियों में शामिल होने वाले लोग एक-दूसरे के साथ व्यापार करना भी चुन सकते हैं. यूरोपीय देशों में, यह कंडी संस्कृति बहुत आम है. इन पार्टियों में ड्रेडलॉक, रंगे बाल, टैटू और पियर्सिंग भी चलन में हैं. अवैध रूप से आयोजित होने वाली रेव पार्टियों के लिए कोई सेट ड्रेस कोड नहीं होता है.

  • रेव पार्टियों में म्यूजिक और डांस के अलावा लाइटिंग भी बहुत खास होती है. वहां एलईडी लाइट, फ्लैश-लाइट और ब्लिंकिंग स्ट्रोब लाइट का बहुत इस्तेमाल होता है. एलईडी लाइट्स विभिन्न सेटिंग्स के साथ विभिन्न रंगों में आती हैं. ग्लविंग डांस का चलन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. उसके लिए खास लाइटिंग की ज़रुरत होती है. इसी वजह से पारंपरिक राव’एन लाइट्स अब सीमित होकर रह गई हैं. अब लाइट्स के नए और अधिक उन्नत संस्करण विकसित किए जा चुके हैं, जिनमें रंगों के ढेरों ऑप्शन हैं. साथ ही स्ट्रिबोन, स्ट्रोब, डॉप्स, हाइपर फ्लैश और अन्य कई तरह की लाइट्स शामिल हैं.

 

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