जानिए कौन है ईश्वरचंद्र विद्यासागर, जिनकी मूर्ति कोलकता में तोड़ी गई !

जानिए कौन है ईश्वरचंद्र विद्यासागर, जिनकी मूर्ति कोलकता में तोड़ी गई !

2019 के लोकसभा चुनाव के छह चरण समाप्त हो चुके हैं और हर चरण में हिंसा देखी गई है। ऐसा नहीं है कि पश्चिम बंगाल में यह पहला हिंसा-विहीन चुनाव है, लेकिन इस चुनावी मौसम में हुई हिंसा ने राष्ट्रीय सुर्खियाँ बटोर ली हैं। पश्चिम बंगाल में मंगलवार को चुनावी माहौल तब गरमाया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह की रैली बाधित हो गई क्योंकि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए।

मंगलवार की हिंसा की चपेट में बंगाल के प्रतीक ईश्वर चंद्र विद्यासागर भी आए , उनकी मूर्ति धवस्त की गई।

आपको बतादें की जिनकी मूर्ति टूटने पर सियासत में बवाल मचा है उन विद्यासागर को दर्शन, शिक्षा और बंगाल समाज में सुधार के लिए उनके योगदान के लिए जाना जाता है। वे अपने समय के प्रसिद्ध शिक्षाविद और समाज सुधारक थे जिन्होंने बंगाल पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को हुआ था। उनके प्रमुख योगदान के तहत उनका प्रयास उस प्रथा को समाप्त करने का था जिसके तहत विधवाओं को छोड़ दिया जाता था। शिक्षा के क्षेत्र में अपने काम के अलावा, वह 19 वीं सदी के बंगाल में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ एक सशक्त आवाज थी। विधवाओं को उनका सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया और विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित करने के लिए अंग्रेजों को मनाने में सफल रहे ।
इतना ही नहीं उन्हें संस्कृत और दर्शन पर अपनी महारत के लिए ‘विद्यासागर’ (ज्ञान के शाब्दिक अर्थ में महासागर) की उपाधि से विभूषित किया गया था। उन्हें 19 वीं सदी के एक प्रमुख समाज सुधारक के रूप में जाना जाता है।

उन्होंने बंगाल के इतिहास और साहित्य पर लगभग 10 पुस्तकें लिखीं।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का 29 जुलाई 1891 को 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

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