ग्लोबल आतंकी के साथ क्या होता है सुलूक? जानिए !

ग्लोबल आतंकी के साथ क्या होता है सुलूक? जानिए !

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मसूद अजहर को आखिरकार ग्लोबल टेररिस्ट करार दे दिया.अभी तक चीन इसमें अड़ंगा बना हुआ था. 27 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए प्रस्ताव पर चीन ने टेक्निकल होल्ड लगाते हुए कुछ वक्त मांगा था. चीन की इस हरकत के बाद उस पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनने लगा. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि किसी आतंकी को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने की क्या प्रक्रिया है और इसमें क्या अड़चनें आती हैं.

क्या है ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने की प्रक्रिया?

किसी भी आतंकी को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का फैसला यूएन सुरक्षा परिषद करती है. इसमें अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस स्थाई सदस्य, जबकि दस अस्थाई सदस्य होते हैं. किसी को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए सभी स्थाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति प्रस्ताव 1267 जिसे आईएसआईएएस और अलकायदा की अनुमोदन सूची भी कहा जाता है, उसमें उस आतंकी का नाम दर्ज करना होता है. इस लिस्ट में नाम आने के बाद वो आतंकी वैश्विक आतंकी घोषित हो जाता है.

ग्लोबल आतंकी के साथ क्या होता है सुलूक

आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में एक बार अगर कोई अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित हो जाता है तो वो जिस देश में रहता है, वहां की सरकार को फौरन ऐसे आतंकी की संपत्ति जब्त करनी होती है. साथ ही इस पर भी नज़र रखनी होती है कि उसे कहीं से भी किसी तरह की आर्थिक मदद न मिले. ग्लोबल टेरेरिस्ट होने का मतलब है कि मसूद अजहर अब संयुक्त राष्ट्र में शामिल किसी भी देश की सीमा में दाखिल नहीं हो सकता और ना ही कोई भी देश उसे वीजा दे सकता है. वो जिस देश में होगा, वहां उसे किसी तरह की यात्रा नहीं करने दी जाएगी.

ग्लोबल टेररिस्ट के लिए क्या हैं संयुक्त राष्ट्र के नियम

संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक जिस देश में ये ग्लोबल टेररिस्ट रहते हैं उस देश पर इनके प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी होती है. मगर पाकिस्तान में ये ग्लोबल टेरेरिस्ट जो चाहते हैं करते हैं, बल्कि पाकिस्तान तो आतंकियों की ऐशगाह बना हुआ है. दाऊद से लेकर हाफिज सईद और मसूद अज़हर तक यहां जब चाहें जहां चाहें घूमते हैं.

27 फरवरी को लाया गया था चौथा प्रस्ताव

पुलवामा हमले के बाद 27 फरवरी को भारत के समर्थन में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस संयुक्त राष्ट्र में अजहर के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आए थे. 10 से ज्यादा देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था. तय किया गया कि अगर सुरक्षा परिषद के किसी सदस्य को इस पर ऐतराज ना हो तो जैश के सरगना मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया जाएगा. प्रस्ताव की समय सीमा 13 मार्च रात 12:30 बजे खत्म हो रही थी. उस समय लगा कि इस बार तो मसूद को उसके किए की सजा मिल ही जाएगी, मगर प्रस्ताव की समय सीमा खत्म होने से सिर्फ एक घंटा पहले चीन ने इस पर अड़ंगा लगा दिया. हालांकि इस प्रस्ताव पर अड़ंगे के बाद सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने चीन को साफ चेतावनी दी कि अगर वो मसूद अजहर को लेकर अपने रुख को नहीं बदलेगा तो कार्रवाई के दूसरे विकल्प भी खुले हैं. ऐसे में चीन पर ना सिर्फ भारत बल्कि दूसरे देशों का दबाव भी बना हुआ था.

10 साल से चाल चल रहा चीन

बीते 10 साल में मसूद को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की 4 बार कोशिश हुई. सबसे पहले 2009 में मनमोहन सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में ये प्रस्ताव रखा था. 2016 में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर प्रस्ताव रखा. 2017 में भारत ने इन्हीं देशों के साथ मिलकर तीसरी बार प्रस्ताव रखा. इसके बाद 2019 में फ्रांस की अगुवाई में फिर से प्रतिबंध परिषद में प्रस्ताव रखा गया. हर बार चीन ने मसूद अजहर को बचाने के लिए वीटो का इस्तेमाल किया. चौथी बार मना करने पर चीन पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ने लगा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाकी के चार सदस्य उससे नाराज होने लगे थे. चीन के वीटो को फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने अपनी तौहीन के तौर पर लिया. दूसरे दुनिया के बाकी देशों में चीन को लेकर धारणा ये बनने लगी कि वो आतंकवादी का हिमायती देश है. इससे वो दबाव में आने लगा.

 ‘टेक्निकल होल्ड’ लगाकर चीन ने मांगा था वक्त

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मार्च में हुई बैठक में हालांकि चीन ने प्रस्ताव को गिराने के लिए वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं किया था, मगर प्रस्ताव को ‘टेक्निकल होल्ड’ पर रखकर विचार करने के लिए वक्त मांगा था. मगर एक महीने बाद इस मसले पर दोबारा हुई बैठक में चीन को झुकना पड़ा और वो जैश के सरगना मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने पर राजी हो गया. इसी के बाद इधर चीन ने मसूद के सिर से हाथ हटाया उधर मसूद अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित हो गया.

पाक में घूम रहे हैं दो अंतर्राष्ट्रीय आतंकी

पाकिस्तान से मसूद अजहर अकेला ग्लोबल टेरेरिस्ट नहीं बल्कि उसके अलावा दाउद इब्राहिम और हाफिज सईद भी ग्लोबल टेररिस्ट हैं. साल 2003 में दाऊद को भारत और अमेरिका ने ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित किया था, जबकि 2012 में अमेरिका ने ग्लोबल टेरेरिस्ट हाफिज सईद पर 10 बिलियन डॉलर का इनाम भी घोषित किया था. फिर भी हाफिज सईद और दाउद इब्राहिम बड़े आराम से जिंदगी गुजार रहे हैं. दाउद इब्राहिम अपना रियल स्टेट का धंधा संभाल रहा है और उसके कई बार विदेश जाने की खबर है. वहीं हाफिज़ सईद का संगठन अपने पुराने अंदाज में आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा है. इतना ही नहीं पिछले आम चुनावों में तो हाफिज ने अपने आतंकियों को चुनाव तक लड़ा डाला और अब वो पाकिस्तान का पीएम बनने का सपना देख रहा है.

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