कोई भी आपदा हो ऐसे करें बचाव

कोई भी आपदा हो ऐसे करें बचाव

जब कोई आपदा आ पड़े तो धैर्य धारण करने में समझदारी है। हिम्मत से काम लें, सही सोचें और संकट से पहले ही उबरने के उपाय करें। अगर कोई विपत्ति आ ही जाए तो पेश हैं कुछ हिदायतें कि क्या करें और क्या न करें।

सामान्य निर्देश

1. अफरा-तफरी न मचाएँ, शान्त रहें, अधिकारियों/प्राधिकृत स्रोतों के निर्देशों का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें। परिवार के लिए पहले से ही एक आपातकालीन योजना बनाएँ और यह भी सुनिश्चित करें कि परिवार के हर सदस्य को इसकी जानकारी हो। घर से निकलने के दो रास्ते बनाएँ। यह तय कर रखें कि अगर परिवार के लोग बिछड़ गए तो कहाँ मिलेंगे। एक समान सम्पर्क व्यक्ति या परिवार का नाम तय कर लें। सुनिश्चित करें कि परिवार का हर सदस्य आपातकालीन सम्पर्क नम्बर जैसे— पुलिस, अस्पताल, एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा, आतंक विरोधी दस्ते आदि के बारे में जाने और उसे यह भी मालूम हो कि इन्हें मदद के लिए कैसे बुलाया जाता है।

2. एक आपातकालीन किट हमेशा तैयार रखें। इसमें प्राथमिक चिकित्सा सामग्री, सूखे मेवे जो जल्दी खराब न हों, पानी शुद्ध करने वाली टिकिया, चादरें, बच्चे-बूढ़ों की जरूरत की चीजें, चाकू सहित उपयोगी औजार, बैटरी, टॉर्च, स्क्रू ड्राइवर, रस्सी, गोन्द वाले टेप और बैटरी से चलने वाला रेडियो शामिल हो।

3. परिचय वाले कागजात, वित्तीय दस्तावेज, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट आदि एक स्थान पर सुलभ रखें। यह भी उपयुक्त होगा कि ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रमाणित फोटो प्रतियाँ किसी वैकल्पिक स्थान पर अथवा भरोसेमन्द मित्र/सम्बन्धी के पास रखें।

4. परिवार के वयस्क सदस्यों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा और कृत्रिम श्वास देने के काम में प्रशिक्षण दिलाना उपयुक्त रहेगा।

5. चौकस रहें और अपने आसपास के पीड़ितों की हर सम्भव सहायता करें। ऐसा कुछ भी न करें जिससे राहत और बचाव कार्यों में बाधा पैदा हो।

भूकम्प

1. अपनी इमारत की संरचना की इंजीनियरों द्वारा जाँच कराएँ और यदि सम्भव हो तो कमजोर भागों को मजबूत कराएँ।

2. घर में गीजर, बड़े फ्रेम वाले फोटो, आइने वगैरह ऐसे स्थानों पर ऊँचे न टांगें कि वे गिर कर किसी को घायल कर सकें।

3. भूकम्प के समय आपकी सबसे बढ़िया प्रतिक्रिया होगी कि निकल भागें, ओट लें अथवा ज्यों का त्यों खड़े रहें। जमीन पर लेट जाएँ, किसी मजबूत मेज या बेड के नीचे छिप जाएँ, घुटनों पर सिर रख लें, सिर हाथों से ढक लें। अगर उपलब्ध हो तो अपना सिर तकिए से ढक लें। अगर पास में कोई मेज या बेड आदि ओट लेने को न हो तो दरवाजे के बीच खड़े हों और भूकम्प रुकने का इन्तजार करें। खिड़कियों, लटक रहे और गिर सकने वाली भारी वस्तुओं से दूर रहें। इमारत से बाहर तभी निकलें जब भूकम्प रुक जाए।

4. अगर आप घर से बाहर हैं तो बिजली के तारों, भवन की बाहरी दीवारों, गली, बत्तियों और पेड़ों से दूर रहें। किसी इमारत के पास न खड़े हों क्योंकि वह गिर सकती है। यदि आप किसी चलती गाड़ी में हैं तो इमारत, दीवार और पेड़ से दूर ठहर जाएँ।

बाढ़

1. उन ऊँची जगहों की पहचान करें जहाँ आप बाढ़ के समय पनाह ले सकते हैं।
2. जब तक बहुत जरूरी न हो, बाढ़ के पानी में न घुसें। पानी की गहराई का पता करें और किसी लाठी से जमीन की मजबूती मालूम कर लें। जहाँ बिजली के तार गिरे हों, उधर मत जाएँ।
3. अपनी गैस और बिजली की सप्लाई बन्द कर दें। बिजली के उपकरणों का स्विच बन्द कर दें।
4. बाढ़ के बाद अक्सर जल जनित रोग फैलते हैं। उनसे बचने के उपाय करें।

आग

1. सुनिश्चित करें कि आपका मकान/पड़ोस ज्यादा से ज्यादा आग से सुरक्षित हो। सुनिश्चित करें कि आग बुझाऊ यन्त्र चालू हालत में हो। पड़ोस में न तो रिसने वाली गैस पाइप हो और न ही चटखी हुई बिजली की तारें। अनुमति से अधिक बिजली न खींचें। ज्वलनशील सामग्री सुरक्षित स्थान पर रखें। सम्भव हो तो स्मोक डिटेक्टर लगाएँ जो धुआं निकलते ही संकेत देता है। ज्वलनशील पदार्थ बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
2. घर/इमारत में आग से बचने का रास्ता तय करें।
3. अपने पड़ोस में आप सुरक्षा अभ्यास करें।
4. आग लगने पर अपने मुँह को भीगे तौलिये से ढकें ताकि धुआं असर न करे। भागते समय रेंग कर निकलें क्योंकि ऊपर जहरीली गैसें, धुआं हो सकता है।
5. अगर कपड़ों में आग लग जाए तो भागें नहीं। आग बुझाने के लिए जमीन पर लुढ़कें।
6. जब तक सुरक्षित होने की घोषणा न की जाए, तब तक इमारत में प्रवेश न करें।
7. जले भाग को ठंडक पहुँचाएँ और विशेष प्राथमिक चिकित्सा का लाभ उठाएँ।

आतंकवाद

1. किसी सन्दिग्ध गतिविधि/वस्तु के प्रति चौकस रहें और इसकी सूचना आतंकवाद विरोधी दस्ते को दें।
2. मकान किराए पर देते समय उस व्यक्ति का पहचान-पत्र जरूर माँगें और उनकी जाँच करें।
3. अपने पड़ोसियों को जरूर जानें।
4. विस्फोट होने पर गिरते मलवे से बचने के लिए ओट लें।
5. प्रभावित इलाके से तुरन्त निकल भागें। सड़कों पर भीड़ न लगाएँ ताकि आपात कार्यकर्ता आ-जा सकें।

समुद्री तूफान

1. समुद्री तूफान के मौसम से पहले ही दरवाजों-खिड़कियों की मरम्मत कराएँ, मकान की छत ठीक कराएँ, सूखे पेड़ हटवा दें और पुराने जर्जर भवन ढहा दें।
2. आपातकालीन किट तैयार रखें जिसमें पानी, खाना, टॉर्च, रेडियो, बैटरियाँ, आपातकालीन दवाएँ और औजार सुलभ हों।
3. तूफान आए तो मकान के अन्दर चले जाएँ या विशेष शरण स्थलों में पनाह लें।
4. सभी खिड़कियाँ-दरवाजे बन्द कर लें। टीन या नुकीले औजार जमीन पर पड़ा रहने न दें। जब तक खतरा न टले बाहर न निकलें।

रासायनिक आपदा

1. अपने क्षेत्र की सूचना व्यवस्था के जरिये सभी जानकारी प्राप्त करते रहें। सायरन का ध्यान रखें। सूचना और निर्देशों के लिए रेडियो/टीवी देखें-सुनें।
2. कहा जाए तो फौरन घर खाली कर दें। अगर बाहर हों तो घटनास्थल से दूर चले जाएँ। ऊँची जगह पहुँचने की कोशिश करें।
3. यदि घर के अन्दर हों तो खिड़की-दरवाजे बन्द कर लें। सभी सुराखों को टेप या प्लास्टिक से बन्द करें। ऐसे कमरे में शरण लें जिसमें कम से कम सुराख हो। एअर कण्डीशनर बन्द कर दें। शरीर को ढके रहें।
4. आपदा के बाद, प्रदूषण मुक्ति निर्देशों का पालन करें। रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित सभी वस्तुओं को इस्तेमाल से पहले साफ करना होगा।

परमाणु आपदा

1. परमाणु हमले के समय शरण लेना जरूरी है। पनाह किसी सुरक्षित स्थान पर ली जा सकती है बशर्ते कि उसकी दीवारें मोटी हों और वे विकिरण से बचा सकें। शरणस्थली में तीन विशेषताएँ होनी चाहिए—बचाव, दूरी और समय। शरणस्थली की दीवारें मोटी हों, वह घटनास्थल से दूर हो तो बेहतर बचाव हो पाएगा। किसी भवन के तहखाने और ऊपरी मंजिल से बचें। लेकिन खुले की अपेक्षा कहीं भी शरण लेना बेहतर होगा।
2. विकिरण तेजी से फैलता है। अतः घटनास्थल से दूर होने पर ही शरण लें।
3. जब तक माहौल सुरक्षित होने की घोषण न हो तब तक शरणस्थली से बाहर न जाएँ।

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