इस वजह से फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ नहीं है कुछ खास !

इस वजह से फिल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ नहीं है कुछ खास !

ओमंग कुमार द्वारा निर्देशित बहुचर्चित विवेक ओबेरॉय अभिनीत फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी इस सप्ताह रिलीज हुई। विभिन्न विवादों में घिरी इस फिल्म ने बीजेपी को एक शानदार जनादेश के साथ लोकसभा चुनाव जीतने के एक दिन बाद रिलीज करने में कामयाबी हासिल की।और अगर आप ये फिल्म देखने वाले हैं तो ज़रा रुकिए ! यहां पांच कारण बताए गए हैं कि आपको ये फिल्म देखने की जरुरत क्यों नहीं है।

कोई रिसर्च नहीं की गयी : ऐसा लगता है की स्क्रिप्ट में रिसर्च की कमी थी। जैसे की भुज भूकंप और अक्षरधाम मंदिर हमले, ये दो बड़ी घटनाएं हैं और फिर गोधरा दंगों का एक दृश्य है जहां उन्हें सुरक्षा बलों और पड़ोसी राज्यों से कोई मदद नहीं मिलती है। ये सभी दृश्य ऐसे थे मानो किसी फिल्म में एक शार्ट फिल्म शुरू होगई हो क्यूंकि इस सीन का पूरी फिल्म में कोई वास्ता ही नहीं था। इसके अलावा भी जो चीजें फिल्म में दिखाई गयीं वह सब विकिपीडिया पर आसानी से मिल सकती हैं। जब सारा कंटेंट विकिपीडिया पर मौजूद है तो फिल्म बनाने का या देखने का क्या मक़सद ?

बुरी तरह से बनाई गई फिल्म: नरेंद्र मोदी पर कई किताबें और सैकड़ों लेख लिखे गए हैं। अब तक आम आदमी उनके जीवन और करियर के बारे में सब जानता है। फिर भी, निर्माताओं ने बिना किसी कारण के आपको वो सब दुबारा दिखाने का फैसला किया। भुज के भूकंप के दृश्य ऐसे दिखते हैं जैसे उन्हें बजट की कमी के कारण एक छोटे से फिल्म सेट पर शूट किया गया था।

विवेक ओबेरॉय: वह निश्चित रूप से सबसे बड़ी वजहों में से एक है कि यह फिल्म देखने लायक नहीं है। हम हर दिन नरेंद्र मोदी को समाचार, टेलीविजन पर देखते हैं, स्पष्ट रूप से उनके पास एक मजबूत व्यक्तित्व है और ओबेरॉय उस करैक्टर को अच्छे से नहीं निभा पाए, उनमे मोदी के तौर-तरीके, शैली या आत्मविश्वास नहीं दिखा ।

Share This

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus (0 )