इस माँ ने जशन मनाया बेटे को 60 % मार्क्स मिलने का

इस माँ ने जशन मनाया बेटे को 60 % मार्क्स मिलने का

जहाँ एक तरफ सोशल मीडिया और अख़बार 10 वीं या 12 वीं बोर्ड परीक्षा के टॉपर्स की प्रशंसा करने में व्यस्थ हैं वहीं एक माँ है जिसने अपने बेटे को सीबीएसई 10 वीं बोर्ड में 60% स्कोर करने के लिए बधाई दी है।

जब दिल्ली की रहने वाली वंदना कटोच ने अपने बेटे आमेर के सीबीएसई कक्षा 10 के बोर्ड परीक्षा परिणाम के बारे में जाना, तो उनकी पहली भावना उनके बेटे के लिए गर्व की  थी  । उनके बेटे ने 60 प्रतिशत स्कोर किया था। जब 60 प्रतिशत अंक आने की ख़बर लेकर आमेर घर पहुंचा तो उसे भी शायद यकीन नहीं हुआ होगा की उसका परिवार उसके अंकों को इस तरह सहारेगा।

क्यूँकि हमारी शिक्षा प्रणाली और समाज है ही ऐसा जिसमे सिर्फ़ अंकों के तराजु में छात्र की बुद्धि को नापा जाता है , इसके बावजूद भी की आज तक के सभी कामयाब लोग ये बताते हैं की उनके स्कूली अंक कभी उनकी कामयाबी के रास्ते नहीं आए।

एक महान अमरीकी आविष्कारक, थॉमस एडिसन की बहुत मशहूर कथनी है , ‘कल मेरा एग्जाम है, लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं है क्योंकि एक पेपर मेरे भविष्य का फैसला नहीं कर सकता’.

अचम्भा तो हुआ होगा कईयों को ये जान कर की कोई माँ 60 प्रतिशत अंकों की ख़ुशी कैसे मना सकती है लेकिन जब आप उनकी पुरी पोस्ट पढ़ने के बाद आपको समझ आता है की क्यों मनाया गया बेटे के 60 प्रतिशत का जशन। आप भी पढ़िये ये पोस्ट और ज़रा इनके नज़रिये से देखिये अपनी बच्चों के अंकों को

 

वंदना उन लोगों में से एक है, जिनका मानना है कि एक रिपोर्ट कार्ड बच्चे की क्षमता को नहीं आंक सकता है। वह जानती थी कि परीक्षा के लिए बेटे ने हार मानने की बजाय कड़ी मेहनत की है। इसलिए, उन्होंने इस तथ्य का जश्न मनाया कि उनके बेटे ने अपना 100% दिया।

वंदना की ये पहल सवाल उठाती है हमारी उस सोच पर जो बच्चों को देखा-देखी में पढ़ाई के बोझ तले इस कदर पिसती है की बच्चा पढ़ाई ज्ञान नहीं बल्कि अच्छे अंक हासिल करने के लिए करता है। और वैसे भी बच्चों की अकांक्षाएं समझना और उनको उनके हर निर्णय में समर्थन करना ही परिवार का मुल उद्देश्य होता है वरना बातें तो पुरी दुनिया करती है और ख्याल रखें कहीं दुनिया को खुश करने के चक्कर में अपने बच्चों का साहस ना तोड़ बैठें , क्यूंकि जिंदगी के एग्जाम में अंक नहीं साहस काम आता है।

 

 

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